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ईद के मौके पर इंसानियत की मिसाल: डॉ. तनवीर अख्तर बने गरीबों के मसीहा – पटना ।

रवि रंजन ।

ईद मुबारक!
ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर जहां पूरा बिहार खुशियों और इबादत में डूबा नजर आया, वहीं राजधानी पटना से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई, जिसने ईद के असली मायने—सेवा, करुणा और इंसानियत—को जीवंत कर दिया।

गांधी मैदान में हजारों रोजेदारों ने नमाज अदा की। इस दौरान राज्य की राजनीति में भी हलचल रही, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहली बार ईद की नमाज में शामिल नहीं हो सके। लेकिन इन तमाम चर्चाओं के बीच एक नाम लोगों की जुबान पर सबसे ज्यादा रहा—डॉ. तनवीर अख्तर।

ईद पर भी सेवा का सिलसिला जारी
जहां एक ओर लोग ईद की खुशियां मना रहे थे, वहीं डॉ. तनवीर अख्तर अपने मरीजों की सेवा में लगे रहे। उनके लिए ईद का मतलब सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाना है। सुबह से लेकर देर रात तक उनके क्लिनिक और निवास पर मरीजों की भीड़ लगी रही।

गरीबों के लिए उम्मीद की किरण
दानापुर निवासी डॉ. अख्तर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से प्राप्त की और आगे की मेडिकल पढ़ाई नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से पूरी की। दिल्ली के प्रतिष्ठित अस्पतालों में अनुभव लेने के बाद उन्होंने पटना लौटकर समाज सेवा को अपना मिशन बना लिया।
आज वह नेक्टर अस्पताल के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं और खासतौर पर गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों के लिए निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराते हैं। कई बार तो वे मरीजों के ऑपरेशन का पूरा खर्च भी खुद उठाते हैं।

परिवार के साथ सादगी भरी ईद
ईद के मौके पर डॉ. तनवीर अख्तर ने अपने परिवार के साथ भी खुशियां साझा कीं। उनकी प्यारी बेटी तुरफा तनवीर बड़े भाइयों के साथ मुस्कुराती हुई नजर आई, जिसने पारिवारिक सौहार्द और ईद की खुशियों को और खास बना दिया।

घर पर मेहमानों को पारंपरिक सेवइयां लच्छा खिलाकर उन्होंने भाईचारे और मोहब्बत का संदेश दिया। बच्चों और परिजनों के साथ ईद की खुशियां साझा करते हुए समूह फोटो में सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी।

परिवार से मिली सेवा की प्रेरणा
डॉ. अख्तर की इस सेवा भावना के पीछे उनकी माता जी और बड़े भाई का अहम योगदान रहा है। बचपन से ही उन्हें “गरीबों की सेवा ही सच्ची इबादत है” का संस्कार मिला, जिसे उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया।

सम्मान और पहचान
अपनी निःस्वार्थ सेवा के लिए डॉ. तनवीर अख्तर को कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। आज वे न सिर्फ पटना बल्कि पूरे बिहार में “गरीबों के मसीहा” के रूप में पहचाने जाते हैं।

ईद का असली संदेश
ईद-उल-फितर सिर्फ खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि साझा भाईचारे, दया और सेवा का संदेश भी देता है। डॉ. तनवीर अख्तर ने अपने कार्यों से यह साबित किया है कि सच्ची ईद वही है, जब हम दूसरों के जीवन में रोशनी बनें।

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