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गांधीवादी मार्टिन लूथर किंग जूनियर के सम्मान में पौधारोपण – बेतिया ।

“विश्व प्रसिद्ध नागरिक अधिकारो के पक्षधर अमर शहीद मार्टिन लूथर किंग जूनियर को मेडल ऑफ़ फ्रीडम दिए जाने की 49 वीं वर्षगांठ पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन।

सतेंद्र पाठक ।

बेतिया। सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में विश्व प्रसिद्ध नागरिक अधिकारों के पक्षधर मार्टिन लूथर किंग जूनियर के सम्मान में पौधारोपण करते हुए एवं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अंतरराष्ट्रीय पीस एम्बेसडर सह सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डा0 एजाज अहमद अधिवक्ता, डॉ0 सुरेश कुमार अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार सह संस्थापक मदर ताहिरा चैरिटेबल ट्रस्ट डॉ0 अमानुल हक, डॉ0 शाहनवाज अली, डॉ0 अमित कुमार लोहिया एवं नवेंदु चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से कहा कि आज ही के दिन महात्मा गांधी के सत्य अहिंसा एवं आपसी प्रेम के आदर्शों एवं विचारों के माध्यम से नागरिक अधिकारों को आम नागरिकों को लाभान्वित करने वाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर को 11 जुलाई 1977 को मडल ऑफ़ फ्रीडम से सम्मानित किया गया था। मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अमेरिका में नागरिक अधिकारों के लिए अनेक अहिंसक आंदोलन का संचालन किया था। वाशिंगटन डीसी में एक विरोध मार्च का नेतृत्व किया, जहाँ उन्होंने अपना प्रसिद्ध “आई हैव ए ड्रीम” भाषण दिया था। उनके प्रयासों से कांग्रेस 1964 एवं 65 के ऐतिहासिक नागरिक अधिकार अधिनियमों को पारित करने में सक्षम हुई। महात्मा गांधी के अहिंसक आदर्शों एवं मूल्यों से अपने प्रयासों के लिए, उन्होंने बड़ी कीमत चुकाई। महात्मा गांधी एवं मार्टिन लूथर किंग जूनियर में अपने बलिदान से नागरिक अधिकारों को अमर कर दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि 11 जुलाई 1977 को, सभी नागरिकों के नागरिक अधिकारों को बढ़ावा देने में उनके अथक कार्यो के लिए, अमेरिकी तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने मार्टिन लूथर किंग को मरणोपरांत स्वतंत्रता का राष्ट्रपति पदक प्रदान किया। स्वर्गीय मार्टिन लूथर किंग जूनियर की पत्नी कोरेटा किंग ने अपने दिवंगत पति की ओर से पदक स्वीकार किया था। पदक प्रदान करते समय, राष्ट्रपति कार्टर ने कहा था कि “मार्टिन लूथर किंग, जूनियर, अपनी पीढ़ी के विवेक थे। उन्होंने अलगाव की महान दीवार को देखा और देखा कि प्रेम की शक्ति इसे गिरा सकती है। उन्होंने हमारे देश को मजबूत बनाया क्योंकि उन्होंने इसे बेहतर बनाने का सपना एवं संकल्प लिया था। उनका सपना हमें अभी भी बनाए रखा है”। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि 35 वर्षीय नागरिक अधिकार नेता डॉ. अल्फ्रेड नोबेल द्वारा स्थापित इस पुरस्कार के सबसे कम उम्र के विजेता थे, जब से पहली बार 1901 में यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। 14 अक्टूबर 1964 को मार्टिन लूथर किंग जूनियर को नोबेल पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई थी। नागरिक अधिकारों के पक्षकार मार्टिन जूनियर ने 1964 में नोबेल शांति पुरस्कार लेते हुए कहा था, “मुझे खुशी है कि दूसरे देशों के लोग हमारी समस्याओं के बारे में चिंतित हैं।” उन्होंने कहा कि वे इस पुरस्कार को इस बात का संकेत मानते हैं कि विश्व जनमत स्वतंत्रता और सम्मान के लिए संघर्ष करने वालों के पक्ष में है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वह शांति पुरस्कार पाने वाले 12वें अमेरिकी भी थे। सबसे पहले 1950 में संयुक्त राष्ट्र के अवर सचिव डॉ. राल्फ जे. बुंचे को यह पुरस्कार मिला था। 1960 में दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व नेता चीफ अल्बर्ट लूथुली को यह पुरस्कार मिला था। डॉ. किंग शांति पुरस्कार पाने वाले 12वें अमेरिकी थे। डॉ. किंग को यह पुरस्कार 10 दिसंबर को ओस्लो में दिया गया ‌था।
14 अक्टूबर1964 को डॉ. किंग ने आज कहा था कि उन्हें दिया गया नोबेल शांति पुरस्कार उन लाखों अमेरिकियों के प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अहिंसा के सिद्धांतों का पालन किया।
डॉ. किंग ने कहा, “मैं इसे केवल अपने लिए सम्मान नहीं मानता, बल्कि यह उन वीर नीग्रो और श्वेत व्यक्तियों के अनुशासित, बुद्धिमानीपूर्ण संयम और राजसी साहस के प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने हमारे देश में न्याय और प्रेम का शासन स्थापित करने के लिए अहिंसक मार्ग अपनाया।”

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