
मो सरफराज ।
नालन्दा / चंडी। प्रखंड मुख्यालय स्थित कार्यशाला भवन में सोमवार को आयोजित पंचायत समिति की बैठक जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण कोरम पूरा नहीं होने पर स्थगित कर दी गई। बैठक दोपहर एक बजे से निर्धारित थी, लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार के बाद भी पर्याप्त संख्या में पंचायत समिति सदस्य और मुखिया बैठक में नहीं पहुंचे। इसके बाद प्रखंड प्रमुख पिंकू देवी ने बैठक स्थगित करने की घोषणा की।

प्रखंड प्रमुख के अनुसार, चंडी प्रखंड में कुल 19 पंचायत समिति सदस्य हैं, जिनमें से महज 7 सदस्य ही बैठक में उपस्थित हुए। वहीं, 13 मुखिया में से केवल एक मुखिया बैठक में पहुंचे। निर्धारित कोरम पूरा नहीं होने के कारण पंचायत समिति की बैठक की कार्यवाही शुरू नहीं हो सकी।
बैठक में प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न विकास योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होनी थी। सड़क, नाली, पेयजल, मनरेगा सहित अन्य योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन के साथ पंचायतों की समस्याओं तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की समीक्षा प्रस्तावित थी। बैठक स्थगित होने के कारण इन सभी मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
प्रखंड प्रमुख पिंकू देवी ने कहा कि अगली बैठक में सभी जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी समझते हुए समय पर उपस्थित हों, ताकि क्षेत्र के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर निर्णय लिया जा सके।
12 पंचायत समिति सदस्यों ने मुखिया के साथ की अलग बैठक
इधर, बैठक में शामिल नहीं हुए 12 पंचायत समिति सदस्यों ने 12 मुखिया के साथ अलग बैठक कर अपना विरोध दर्ज कराया। पंचायत समिति सदस्य अनिल कुमार, सोनू कुमार, मनीष कुमार समेत अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि पिछले करीब दो वर्षों से पंचायत समिति की बैठक नहीं हुई है। उनका कहना है कि बैठक नहीं होने के कारण विकास योजनाओं को लेकर पारदर्शिता का अभाव है और योजनाओं में मनमानी की जा रही है।
विक्षुब्ध पंचायत समिति सदस्यों ने कहा कि बैठक आयोजित कराने के लिए कई बार संबंधित पदाधिकारियों से आग्रह किया गया, लेकिन इसके बावजूद नियमित बैठक नहीं हो सकी। इसी कारण उन्होंने सोमवार को आयोजित पंचायत समिति की बैठक का बहिष्कार करते हुए खुद को अलग रखने का निर्णय लिया।
पंचायत समिति सदस्यों और मुखिया की अलग बैठक में विकास योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में कथित मनमानी को लेकर नाराजगी जताई गई। सदस्यों ने कहा कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका और उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मुखिया संघ के अध्यक्ष मणिकांत मनीष ने बताया कि मुखिया संघ की ओर से कई बार पंचायत समिति की बैठक आयोजित कराने का आग्रह किया गया था। उन्होंने कहा कि करीब दो वर्षों से बैठक नहीं होने के कारण कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि दो दिन पहले 11 पंचायत समिति सदस्य मुखिया संघ के अध्यक्ष समेत अन्य मुखिया से मिले थे। सदस्यों ने बैठक नहीं होने के कारण क्षेत्र के विकास कार्यों में आ रही बाधाओं की जानकारी दी थी। इसके बाद 11 पंचायत समिति सदस्यों और 12 मुखिया ने अलग बैठक कर पंचायत समिति की बैठक के बहिष्कार का निर्णय लिया।
अब पंचायत समिति की अगली बैठक में यह मामला किस तरह सामने आता है और विकास योजनाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच बनी नाराजगी कैसे दूर होती है, यह देखने वाली बात होगी।



