नालंदा विश्वविद्यालय में ‘रीथिंकिंग ग्लोबल जस्टिस’ पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी – राजगीर ।

रवि रंजन ।
नालन्दा / राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में ‘रीथिंकिंग ग्लोबल जस्टिस’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव, वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों, गरीबी, असमानता और न्यायपूर्ण वैश्विक शासन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन हुआ। कार्यक्रम में येल विश्वविद्यालय के प्रख्यात दार्शनिक और ग्लोबल जस्टिस विशेषज्ञ प्रोफेसर थॉमस पोगे मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने प्रोफेसर थॉमस पोगे के अकादमिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पोगे का शोध दर्शनशास्त्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थशास्त्र, सामाजिक न्याय, अंतरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति विज्ञान जैसे क्षेत्रों से भी गहराई से जुड़ा है।
कुलपति ने कहा कि पोगे के विचारों के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय न्याय तथा ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच मौजूद असमानताओं को एक साथ समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अलग-अलग देशों और विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद और ज्ञान के सह-निर्माण की आवश्यकता है।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर थॉमस पोगे ने नालंदा विश्वविद्यालय पहुंचने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि भारत के साथ उनका गहरा बौद्धिक जुड़ाव रहा है और उनकी बौद्धिक यात्रा की शुरुआत भी भारत से जुड़ी रही है। उन्होंने गरीबी के खिलाफ हुई प्रगति के साथ-साथ बढ़ती असमानता को लेकर चिंता जताई।
प्रोफेसर पोगे ने कहा कि सिर्फ गरीबी कम होना ही प्रगति का पैमाना नहीं हो सकता। यह भी देखना जरूरी है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सबसे वंचित तबके तक कितना पहुंच रहा है। उन्होंने गरीबी और असमानता को मापने के मौजूदा तरीकों पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।
संगोष्ठी में तीन प्रमुख सत्र आयोजित किए गए। इनमें गरीबी, विकास और वैश्विक न्याय, नैतिकता, वैश्विक शासन और संस्थागत जवाबदेही तथा बौद्धिक संपदा अधिकार, नवाचार और वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। इसके बाद वैलेडिक्टरी सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय, काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी बेंगलुरु, यूनिवर्सिटी ऑफ लीपजिग, गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन, RIS नई दिल्ली और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वानों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
प्रमुख प्रतिभागी:
प्रोफेसर अशोक आचार्य, प्रोफेसर सैकत सिन्हा रॉय, प्रोफेसर एस.के. मोहंती, प्रोफेसर नित्या नंदा, प्रोफेसर जोस नंधिक्कारा, डॉ. सौम्यदीप चौधरी, श्री सैयद अरसलान अली, प्रोफेसर अरविंद कुमार, प्रोफेसर के.जे. जोसेफ, प्रोफेसर शेषाद्रि चारी, डॉ. बी. चेंगप्पा, डॉ. सब्यसाची साहा और प्रोफेसर अलख शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।



