हरतालिका तीज पर पप्पू सरदार ने निभाया भाई का फर्ज – जमशेदपुर ।
51 सुहागन बहनों को भेंट किया सोलह श्रृंगार का तोहफा, बोलीं महिलाएं—“मायके से मिलने वाले उपहार की कमी पप्पू भैया ने पूरी कर दी”

रवि रंजन ।
जमशेदपुर : हरतालिका तीज के पावन अवसर पर जमशेदपुर के चर्चित समाजसेवी और बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के मुंहबोले भाई पप्पू सरदार ने भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत मिसाल पेश की। उन्होंने साकची स्थित हांडी लाइन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 51 जरूरतमंद सुहागन महिलाओं के बीच सोलह श्रृंगार की सामग्री और उपहार वितरित किए।

तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं को दिए गए उपहार किट में सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, आलता समेत सुहाग से जुड़ी विभिन्न सामग्री शामिल थी। उपहार पाकर महिलाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।
मानगो की शारदा देवी, बारीडीह की कल्पना देवी समेत अन्य महिलाओं ने पप्पू सरदार को अपना भाई बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर तरक्की की कामना की। महिलाओं ने भावुक होकर कहा, “तीज पर मायके से मिलने वाले उपहार की कमी आज पप्पू भैया ने पूरी कर दी।” उन्होंने इस आत्मीय पहल के लिए पप्पू सरदार का आभार जताया।

राखी के रिश्ते को सामाजिक सेवा से जोड़ा
कार्यक्रम के दौरान पप्पू सरदार ने कहा कि बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित उन्हें राखी बांधती हैं और वे उन्हें अपनी बहन मानते हैं। इसी भाई-बहन के रिश्ते से मिली प्रेरणा को वे सामाजिक सेवा के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि “हरतालिका तीज नारी शक्ति, प्रेम और अटूट सुहाग की आस्था का पर्व है। मेरी सभी बहनों और मेरी बहन बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित जी को तीज की हार्दिक शुभकामनाएं।”
पप्पू सरदार ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक खुशी इस बात की है कि त्योहार के अवसर पर उन्हें इतनी बहनों का स्नेह, आशीर्वाद और अपनापन मिल रहा है।
29 वर्षों से ‘माधुरी त्योहार’ के जरिए सामाजिक संदेश
गौरतलब है कि पप्पू सरदार पिछले 29 वर्षों से बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित का जन्मदिन ‘माधुरी त्योहार’ के रूप में मनाते आ रहे हैं। उनके आयोजनों में मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक सेवा को भी विशेष महत्व दिया जाता है। विभिन्न पर्व-त्योहारों पर जरूरतमंद लोगों के बीच सहयोग और उपहार वितरण इसी सामाजिक सरोकार का हिस्सा है।
क्या है हरतालिका तीज?
हरतालिका तीज हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण व्रत-पर्व है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शाम को भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं।
माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि उनकी सखियां उन्हें वन में ले गईं, जहां उन्होंने भगवान शिव की आराधना की। इसी कथा से ‘हरतालिका’ नाम जुड़ा माना जाता है—‘हरत’ अर्थात हरण और ‘आलिका’ अर्थात सखी।
हरतालिका तीज श्रद्धा, दांपत्य प्रेम, नारी शक्ति और अखंड सौभाग्य की आस्था से जुड़ा पर्व है। सुहागन महिलाएं जहां पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति की कामना करती हैं।



