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नालंदा की छात्राओं से बोलीं DM उदिता सिंह- ‘आवाज उठाइए, समाधान खोजिए, सिस्टम आपकी मदद के लिए खड़ा है’ – बिहार शरीफ ।

रवि रंजन ।
बिहारशरीफ (नालंदा): नालंदा की जिलाधिकारी उदिता सिंह ने छात्राओं को अपनी समस्याओं के खिलाफ निडर होकर आवाज उठाने और समाधान की दिशा में खुद पहला कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान की शुरुआत उसकी पहचान से होती है। समस्या को समझिए, सही-गलत का फैसला कीजिए और जरूरत पड़ने पर अभिभावक, शिक्षक, पुलिस और प्रशासन की मदद लीजिए।


‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत एस.एम.पी.डी. बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मथुरिया में छात्राओं के साथ जिला पदाधिकारी का संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान डीएम ने प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका से आगे बढ़कर छात्राओं से अभिभावक और मार्गदर्शक के रूप में संवाद किया।
छात्राओं ने खुलकर बताईं स्कूल की समस्याएं
कार्यक्रम में छात्राओं ने विद्यालय और आसपास की कई समस्याओं को जिलाधिकारी के सामने रखा। छात्राओं ने स्कूल के मुख्य द्वार के आसपास असामाजिक तत्वों के जमावड़े, कमेंटबाजी और टीजिंग, साफ-सफाई की समस्या, स्ट्रीट लाइट की कमी, CCTV कैमरों की जरूरत, पेयजल की व्यवस्था, शिक्षकों और क्लासरूम की कमी जैसे मुद्दे उठाए।
कक्षा 12 की छात्रा नीलिमा कुमारी ने भूगोल और हिंदी विषय के शिक्षकों की कमी के साथ क्लासरूम की समस्या बताई। उन्होंने पढ़ाई के दौरान होने वाले भटकाव से बचने का रास्ता पूछा और बताया कि उनका सपना IAS अधिकारी बनने का है।
वहीं कक्षा 9 की छात्रा शिवानी कुमारी ने भी अपनी भविष्य की आकांक्षाएं साझा कीं। उन्होंने स्कूल के आसपास स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई की समस्या की ओर ध्यान दिलाया।
‘समस्या की पहचान से शुरू होता है समाधान’
छात्राओं की समस्याएं सुनने के बाद जिलाधिकारी ने संवाद को परिचर्चा का रूप दिया। उन्होंने छात्राओं से पूछा कि किसी समस्या को सामने रखने से पहले क्या उन्होंने कभी उसके समाधान के बारे में सोचने की कोशिश की है।
टीजिंग जैसी स्थिति से निपटने के सवाल पर छात्राओं ने कहा कि पहले स्थिति को समझना चाहिए, फिर जरूरत के अनुसार अभिभावकों और शिक्षकों को जानकारी देनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन को बताने के साथ आवश्यकता पड़ने पर पुलिस और प्रशासन की मदद भी ली जा सकती है।
जिलाधिकारी ने छात्राओं के जवाबों की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी समस्या के समाधान का पहला चरण उसकी पहचान है। इसके बाद यह तय करना जरूरी है कि स्थिति सही है या गलत। यदि कुछ गलत हो रहा है तो उसे बदलने के लिए निर्णय लेना और उसके लिए आगे बढ़ना जरूरी है। इसी प्रक्रिया से नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
‘ईश्वर उसी की मदद करता है, जो अपनी मदद खुद करता है’
छात्राओं को प्रेरित करते हुए जिलाधिकारी ने प्रसिद्ध उक्ति ‘God helps those who help themselves’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इसका संदेश यही है कि जो व्यक्ति खुद अपनी मदद करने और समस्या से बाहर निकलने का प्रयास करता है, उसके लिए मदद के रास्ते भी खुलते जाते हैं।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि किसी भी समस्या को छोटा समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मोबाइल या सामान खोने पर लोग तुरंत शिकायत करते हैं, लेकिन टीजिंग या छेड़खानी जैसी घटनाओं की शिकायत कई बार नहीं की जाती।
डीएम ने कहा कि छात्राओं की शिकायत केवल शिकायत नहीं होती, बल्कि इससे प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किस इलाके में किस तरह की समस्या मौजूद है। उन्होंने बताया कि छात्राओं द्वारा पहले बताई गई संवेदनशील जगहों पर 112 की गाड़ियों और पुलिस प्रशासन की टीम की तैनाती की गई है। विद्यालय स्तर पर नियमित फॉलोअप और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने का निर्देश दिया गया है।
‘मौन मत रहिए, Vocal बनिए’
जिलाधिकारी ने छात्राओं से कहा कि उन्हें अपनी बात रखने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को संदेश दिया कि वे ‘मौन मत रहिए, Vocal बनिए’ और अपने आसपास होने वाली गलत गतिविधियों के प्रति सजग रहें।
उन्होंने कहा कि छात्राएं नालंदा, बिहार और देश का भविष्य हैं। आज जो समस्याएं छात्राएं झेल रही हैं, आने वाले समय में समाज को ऐसा बनाने का प्रयास होना चाहिए कि अगली पीढ़ी की बेटियों को इन समस्याओं का सामना न करना पड़े।
डीएम ने छात्राओं से कहा कि भविष्य में जब वे जिम्मेदार पदों पर बैठें और समाज में बदलाव की दिशा में काम करें, तब उन्हें महसूस हो कि वर्तमान प्रयासों से परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव आया है।
AI और तकनीक से समाधान खोजने की सलाह
कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने छात्राओं को तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के महत्व से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आज का दौर तकनीक और AI का है। किसी समस्या का समाधान समझ में नहीं आ रहा हो तो इंटरनेट और AI की मदद से अलग-अलग विकल्प तलाशे जा सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा से AI के माध्यम से सवाल पूछवाकर इसका लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया। AI से मिले सुझावों को छात्राओं के विचारों से जोड़ते हुए जिलाधिकारी ने समझाया कि तकनीक समस्याओं के समाधान के नए रास्ते दिखा सकती है।
हालांकि उन्होंने छात्राओं को यह भी सलाह दी कि AI से मिली हर जानकारी को बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। जानकारी को समझना, उसकी सत्यता जांचना और फिर अपनी जरूरत के अनुसार उसका इस्तेमाल करना जरूरी है।
जिलाधिकारी ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि मदद का रास्ता खोजने की कोशिश कीजिए, कई रास्ते दिखाई देने लगेंगे। उन्होंने छात्राओं से शिक्षा, करियर और जीवन के फैसलों में सजग रहने तथा अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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