तिरंगा हाथ में, प्रकृति के बीच कदमताल: घोड़ा कटोरा से गिरियक जलाशय तक गूंजा राष्ट्रप्रेम का संदेश – राजगीर ।

रवि रंजन ।
राजगीर (नालंदा): स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति से जुड़ाव का अनूठा संदेश देने के लिए राजगीर की हरी-भरी वादियों में ‘तिरंगा ट्रैक’ का आयोजन किया गया। घोड़ा कटोरा इको पार्क से शुरू हुई यह ट्रैकिंग इंद्रशाला गुफा होते हुए गिरियक जलाशय तक पहुंची। नालंदा वन प्रमंडल के राजगीर रेंज और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कुल 38 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
सुबह करीब 7 बजे ट्रैकिंग की शुरुआत हुई। निर्धारित समय से पहले ही प्रतिभागी घोड़ा कटोरा इको पार्क पहुंचने लगे थे। पंजीकरण के बाद जैसे ही प्रतिभागियों ने हाथों में तिरंगा लेकर प्राकृतिक पगडंडियों पर कदम बढ़ाए, पूरा वातावरण देशभक्ति के जोश से भर गया। महिला प्रतिभागियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
राजगीर की प्राकृतिक खूबसूरती से रूबरू हुए प्रतिभागी ।

ट्रैकिंग के दौरान प्रतिभागियों को राजगीर की पहाड़ियों, घने वन क्षेत्र, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखने का मौका मिला। कई प्रतिभागियों के लिए यह पहली ट्रैकिंग थी। वहीं कुछ प्रतिभागी ऐसे भी थे, जो इससे पहले उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों में ट्रैकिंग कर चुके थे। उनका कहना था कि राजगीर की पहाड़ियों और स्थानीय वन क्षेत्र में ट्रैकिंग का अनुभव बिल्कुल अलग और यादगार रहा।
उप विकास आयुक्त, नालंदा सुश्री सारा अशरफ ने ट्रैकर्स और मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नालंदा, विशेषकर राजगीर की प्राकृतिक संपदा से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि नालंदा केवल अपनी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अद्वितीय प्राकृतिक संपदा के लिए भी जाना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के जरिए युवाओं को अपने जल, जंगल और जमीन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह आयोजन सिर्फ ट्रैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय प्राकृतिक विरासत के करीब लाना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
सुरक्षा के लिए किए गए विशेष इंतजाम
जिला प्रशासन की ओर से ट्रैकिंग में शामिल प्रतिभागियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। ट्रैकिंग रूट पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। मेडिकल टीम और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं, ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में प्रतिभागियों को तत्काल सहायता मिल सके।
नालंदा के युवा ट्रेकर अनमोल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इससे पहले उत्तराखंड में ट्रैकिंग की है, लेकिन राजगीर में ट्रैकिंग का अनुभव अपने आप में अनोखा और रोमांचक रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से अपने आसपास की वन संपदा और प्राकृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

तिरंगे के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
पूरे ट्रैकिंग रूट पर प्रतिभागी हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ते रहे। रास्ते में ‘हर घर तिरंगा’, ‘स्वच्छ एवं हरित भारत’ और पर्यावरण संरक्षण जैसे संदेशों के जरिए राष्ट्रप्रेम के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।
सहायक वन संरक्षक, नालंदा वन प्रमंडल श्रीमती सिम्मी प्रियनैना ने कहा कि इस आयोजन को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से लोगों को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ने के साथ राजगीर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक किया जा सकता है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसी गतिविधियां आयोजित करने की बात कही।
अधिकारियों और कर्मियों ने भी की ट्रैकिंग
‘तिरंगा ट्रैक’ के दौरान वन विभाग और जिला प्रशासन की टीम ने प्रतिभागियों की सुविधा एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा। कार्यक्रम की कवरेज के लिए मीडिया प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सोशल मीडिया और लाइव माध्यमों के जरिए भी इस पहल को लोगों तक पहुंचाया गया।
पूरे ट्रैकिंग रूट पर उप विकास आयुक्त सारा अशरफ, सहायक वन संरक्षक सिम्मी प्रियनैना, राजगीर रेंज के रेंज अधिकारी श्याम कुमार पांडे, डायरेक्टर डीआरडीए, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित वन विभाग और जिला प्रशासन के पदाधिकारी एवं कर्मी टीम के साथ मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने जिला प्रशासन और राजगीर फॉरेस्ट रेंज का इस यादगार अनुभव के लिए आभार जताया। ‘तिरंगा ट्रैक’ ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रप्रेम केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की वन संपदा, जल, जैव विविधता और प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना भी राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।


