हद है रे भाय! मनरेगा में चार करोड़ लूट को दे दिया क्लीन चिट – नवादा |
अधिकारियों के फर्जीवाड़े की खुल रही कलई

रवीन्द्र नाथ भैया |
जिले में मनरेगा में लूट की खुली छूट का समर्थन हर अधिकारियों का प्राप्त है। तभी तो आरटीआई के तहत मांगी गयी सूचना में अधिकारियों द्वारा बगैर दिनांक की सूचना देकर संबंधित को बचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। यह बात अलग है कि आज नहीं तो कल सच्चाई का पर्दा उठना तय है। हां! समय का इंतजार है।
जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं जिले के वारिसलीगंज मनरेगा के तत्कालीन परियोजना पदाधिकारी का। जिन्होंने मात्र एक दिन लिये मनरेगा पोर्टल के खुलते ही नियम के विरुद्ध अपने चहेते पंचायतों को चार करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया था।
जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल ने उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए सीपीग्राम पर मामले को उठाते हुए मामले की जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराने का अनुरोध किया था। सीपीग्राम से सिधे जिला प्रशासन को भेज दिया। हालात वहीं हुआ:- दूध की रखवाली बिल्ली को। जबाव उसी आरोपी से मांग वहीं सारे अधिकारियों ने मान लिया जो आरोपी ने कहा। यानी लूट को जायज ठहराते हुए मामले की इतिश्री कर दी।
अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि साक्ष्य के रूप में जिस एकमात्र स्क्रीन शाट का सहारा लिया गया वह किस तिथि का है? क्या बगैर ज्ञापांक व तिथि की मान्यता को स्वीकार किया जा सकता है? जाहिर है लूट व फर्जीवाड़े के मामले में सभी एक ही पाठशाला के शिष्य हैं। तभी तो मनरेगा के मामले में कहावत प्रचलित है:- हमहूं लूटव, तुहूं लूट, लूटे के आजादी बा।
बहरहाल फिलहाल उक्त अधिकारी को भले ही राहत मिली हो लेकिन मामला शांत होने के बजाय और तेजी से आगे बढ़ना तय है। इसके लिए न्यायालय का शरण लेना पड़ा तो उसकी भी तैयारियां आरंभ कर दी गयी है। चूंकि मामला चार करोड़ गवन का है जिसमें कई अधिकारियों की पोल खुली लगभग तय है।



