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बिजली की आंख मिचौनी से किसान परेशान, निर्बाध बिजली नहीं मिलने से धान रोपनी में हो रही परेशानी – नवादा |

रवीन्द्र नाथ भैया |

सतत सुखाड़ जिले में धान की रोपनी करना किसानों के लिए सरदर्द सावित हो रहा है। वर्षा की कमी, सात बरसाती नदियों का सुखा रहना,बिजली की आंख मिचौनी तथा मात्र एक ही दिन में पौरा पूर्वी नहर में पानी का सुख जाना किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
धान का कटोरा कहा जाने वाला वारिसलीगंज के किसानों को पानी के अभाव में धान रोपनी बंद कर देना पड़ा। मात्र एक दिन पौरा पूर्वी नहर में पानी आने के बाद प्रखंड में युद्धस्तर पर रोपनी शुरू हुई थी, परंतु दूसरे दिन ही नहरी पानी की धार समाप्त हो गई। फलतः किसानो को अब धान रोपनी में बिजली ही एक मात्र सहारा बन सकती है, लेकिन बिजली रानी की आवाजाही से किसान परेशान हैं।
कभी पांच मिनट बाद तो कभी 10 मिनट पर बिजली कटती रहती है। इस बीच वर्षा का अभाव एवं सकरी नदी में मात्र एक दिन पानी आने से क्षेत्र के किसान काफी मायूस हो रहे है।
सावन माह में कड़ाके की धूप देख किसानों में अकाल ने की आशंका पनप रही है। नहरी क्षेत्र होने के बावजूद वारिसलीगंज प्रखंड में अभी तक धान की रोपनी 15 से 20 फीसदी भी नहीं हो सकी है। फिलहाल गांव के कुछ किसान अपने वैकल्पिक संसाधनों से धान रोपनी कर रहे हैं। रोपनी हुए फसलों को प्रति दिन सिंचाई करना किसानों के लिए परेशानी का सबब है।
धान रोपनी को लेकर प्रति दिन पम्पिंग सेट चलाने के कारण क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न हो रही है। उपरी एवं मध्य जलस्तर पर लगा गरीबों का अधिकांश चापाकलों में अब तक पानी उगलना शुरू नहीं किया है। जिले के कई गांवो में अब तक धान की रोपनी शुरू भी नहीं हो सकी है, जबकि जुलाई माह समाप्त हो चुका है।

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