जेसोवा दिवाली मेले में डॉ. मृणालिनी अखौरी की गजलों का जादू, सुरों से सजी संगीत की शाम – रांची।

जगजीत सिंह से लेकर फरीदा खानम तक की मशहूर गजलों की दी प्रस्तुति, बुजुर्ग दंपती की फरमाइश पर ‘आज जाने की जिद न करो’ ने बांधा समां
रवि रंजन ।
रांची : मोराबादी मैदान में जेसोवा की ओर से आयोजित दिवाली मेला-2026 की सांस्कृतिक संध्या उस समय यादगार बन गई, जब झारखंड की मशहूर गायिका डॉ. मृणालिनी अखौरी ने अपनी सुरीली आवाज और शानदार गायकी से पूरे माहौल को गजलमय कर दिया। गीतों और गजलों की उनकी दिलकश प्रस्तुतियों ने मेले में पहुंचे श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत की इस महफिल में कभी पुरानी यादों की मिठास घुली तो कभी सुरों की ऐसी महक बिखरी कि श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मृणालिनी अखौरी ने मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह की लोकप्रिय गजल ‘तुमको देखा तो ये ख्याल आया’ से की। पहली ही प्रस्तुति ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। इसके बाद फरमाइशों का सिलसिला शुरू हुआ। दर्शकों की पसंद और उनकी मांग को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक से बढ़कर एक सदाबहार गजलें पेश कीं।
उन्होंने ‘होंठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो’, ‘होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है’ और ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो’ जैसी लोकप्रिय गजलों को अपनी आवाज में पेश कर संगीत प्रेमियों को पुराने दौर की यादों में पहुंचा दिया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज ने गायिका का उत्साह बढ़ाया।
इस संगीतमय शाम का सबसे भावुक और खास पल तब आया, जब एक बुजुर्ग दंपती ने फरीदा खानम की मशहूर गजल ‘आज जाने की जिद न करो’ सुनाने की फरमाइश की। डॉ. मृणालिनी ने इस गजल को बेहद खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी भावपूर्ण गायकी ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। यह प्रस्तुति मेले की यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हो गई।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में उन्होंने देश के जवानों को समर्पित लोकप्रिय गजल ‘चिट्ठी आई है, वतन से चिट्ठी आई है’ पेश की। इसके बाद ‘गली में आज चांद निकला’ की प्रस्तुति ने माहौल को फिर से खुशनुमा बना दिया। श्रोता गीतों की धुन पर झूमते नजर आए।
डॉ. मृणालिनी अखौरी की गायकी में सुर, भाव और संगीत का खूबसूरत संगम देखने को मिला। जेसोवा की सदस्यों सहित उपस्थित लोगों ने उनकी प्रस्तुति की जमकर सराहना की। कुल मिलाकर, जेसोवा दिवाली मेला-2026 की यह संगीत संध्या गजलों के शौकीनों के लिए यादगार बन गई।



