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सहयोग पोर्टल करेगा समस्या का समाधान? – नवादा |

अपने ही उपर लगे आरोपों में अपने आपको सजा देंगे अधिकारी?

रवीन्द्र नाथ भैया |

बिहार सरकार द्वारा आरंभ किये गये सहयोग पोर्टल आम नागरिकों की समस्या का समाधान कर पायेगा? सवाल आम नागरिकों द्वारा पूछा जाने लगा है। सरकारी आदेश के अनुसार सहयोग पोर्टल पर दर्ज आरोपों का समाधान तीस दिनों के अंदर नहीं किये जाने पर जिम्मेदार अधिकारी स्वत: अपने आपको निलंबित समझेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल जिस अधिकारी पर आरोप लगाया जायेगा वह अपने आपको दोषी मानेगा? अगर नहीं तो फिर सहयोग पोर्टल किस काम का? यह जनता को मूर्ख बनाने का हथियार तो नहीं?
अब इसकी एक बानगी मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं। इसे पढ़कर आप खुद निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हैं सहयोग पोर्टल से न्याय मिल भी पायेगा या नहीं?
जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल के साथ डीएम ने जनता दरबार में न केवल अपमानित किया बल्कि एक बार नहीं दो दो बार उनका मोबाइल जब्त किया। भले ही ऐसा करने का अधिकार किसी को न हो लेकिन किया गया। सूचना उन्होंने राज्य के तमाम अधिकारियों को आवेदन के माध्यम से दिया। चूंकि मामला डीएम से जुड़े होने के कारण अबतक कार्रवाई तो दूर मामले की जांच तक आरंभ नहीं की गयी।
इस बीच सरकार ने सहयोग पोर्टल लॉन्च किया। उन्होंने सहयोग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। संभवतः जिले में इसकी पहली शुरुआत थी। जबाव डीएम को देऩा था वह भी तीस दिनों के अंदर। सो उन्होंने जबाव दिया। जबाव देखकर आप भी चौंक जाएंगे। उन्होंने आरोपों को “निरर्थक” बता सिरे से खारिज कर दिया।
ऐसे में कहा जाने लगा है ” दूध की रखवाली बिल्ली को” अब आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं सहयोग पोर्टल आपको कितना सहयोग पहुंचा पायेगा?

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