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जिले में करीब 10 हजार ई-रिक्शा में लगभग आधा है बगैर रजिस्टर्ड – नवादा ।

ई-रिक्शा बनी परेशानी का सबब
– जिला परिवहन विभाग में अब तक तीन हजार ई-रिक्शा का है रजिस्ट्रेशन
– प्रजातंत्र चौक से समाहरणालय तक हर दिन रहता है ई-रिक्शा का दिनों भर जमावड़ा
– नबालिग भी कर रहे ई-रिक्शा का परिचालन

रवीन्द्र नाथ भैया ।
जिले में पिछले एक दशक से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इसका सबसे बड़ा कारण ई-रिक्शा माना जा रहा है। परिवहन व यातायात नियमों को ताक पर रखकर चलाये जा रहे ई-रिक्शा से आम नागरिक त्रस्त तो है ही परिवहन विभाग को भी राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पूरे जिले में करीब 10 हजार ई-रिक्शा परिचालित है, जिसमें लगभग आधा ई-रिक्शा का पंजियन किया गया है। इतनी संख्या में बगैर पंजियन के ई-रिक्शा का होना कहीं ना कहीं डीलरों की मनमानी व विभागीय स्तर पर लापरवाही सामने आ रही है। इसी वजह से सड़कों पर ई-रिक्शा का भरमार हो गया है, जिससे यातायात की समस्याएं उत्पन्न हो रही है।
इतनी तेजी से बढ़ती ई-रिक्शा के चालकों को अभी तक यातायात नियमों की जानकारी देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। इन ई-रिक्शा चालकों के पास यातायात नियमों की जानकारी का अभाव रहने के कारण सड़कों पर जहां-तहां जाम की समस्याएं उत्पन्न हो रही है।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि पंजियन से अधिक ई-रिक्शा सड़कों पर आखिर दौड़ कैसे रहा है, इसका कभी भी विभाग द्वारा जांच नहीं किया जा सका है, जिसके कारण बगैर रजिस्ट्रेशन के ई-रिक्शा की भरमार हो चुकी है। बगैर रजिस्ट्रेशन वाले ऐसे कई ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रही है जिसमें नंबर प्लेट नहीं है। ऐसे ई-रिक्शा पर विभाग ने आज तक गम्भीरता नहीं दिखाई। बता दें कि ई-रिक्शा के लिए हरा रंग का नंबर प्लेट जारी किया गया है।
ई-रिक्शा के अनियमित संचालन से लोग त्रस्त:-
नगर में काफी भीड़ रहने के कारण आये दिन जाम लग रही है। ऐसे में ई-रिक्शा की मनमानी से लोगों को पैदल चलना मुश्किल हो गया है। प्रशासन द्वारा कई बार सख्ती बरती गई, परंतु इसका कोई असर नहीं हुआ । स्थानीय नागरिक ई-रिक्शा के अनियमित परिचालन से काफी त्रस्त हैं।
शहर का प्रमुख इलाका प्रजातंत्र चौक है, जहां से मेन रोड ,पार नवादा, विजय बाजार, अस्पताल रोड तथा भगत सिंह चौक के तरफ जाने के लिये भीड़ लगी रहती है। प्रजातंत्र चौक पर सड़क के बीचो-बीच ई-रिक्शा खड़ी की जा रही है और यहां तैनात ट्रैफिक पुलिस के द्वारा लाख मना करने के बाद भी कोई प्रभाव नहीं प़ड़ रहा हैं।
दुर्भाग्य इस बात का है कि इमरजेंसी पड़ने पर भी केवल छटपटाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
अधिकारी से लेकर एम्बुलेंस तक को होना पड़ता है जाम का शिकार:-
शहर में जाम की समस्या से बड़े साहब की गाड़ी ही नहीं बल्कि एम्बुलेंस और दमकल जैसी इमरजेंसी वाहन भी जाम का शिकार हो रहा है। समाहरणालय से लेकर प्रजातंत्र चौक तक ई-रिक्शा का अवैध ठहराव जाम का प्रमुख कारण बना हुआ है। वहीं आम लोगों द्वारा बाइक और अन्य वाहनों को भी सड़कों पर जहां-तहां लगा दिया जाता है, जिससे जाम की समस्याएं जस की तस बनी हुई है। यातायात पुलिस की मानें तो ई-रिक्शा को जितना भी बोला जाता है मानते ही नहीं है। ऐसे में सख्त कार्रवाई से ही शहर को जाम से निजात दिलाया जा सकता है।
शहर में ई-रिक्शा पर प्रशासन नहीं कस रही नकेल:-
शहर में आये दिन ई-रिक्शा के कारण दुर्घटनाएं आम हो गई है। हर दिन किसी ना किसी मार्ग पर ई-रिक्शा के द्वारा राहगीरों को धक्का मारने की घटनाएं आम हो चुकी है, बावजूद प्रशासन इसपर कार्रवाई नहीं कर रही है।
बता दें कि जितने भी ई-रिक्शा चालक है उसमें अधिकांश नबालिग चला रहे हैं, वैसे लोगों को यातायात नियमों का कुछ भी जानकारी नहीं है। लापरवाही से सड़कों पर दौड़ती ई-रिक्शा से कई दुर्घटनाएं हो चुकी है तथा कईयों की जान भी जा चुकी है।
एक साल पूर्व प्रजातंत्र चौक पर एक बच्ची की मौत ई-रिक्शा के पलटने से हो चुकी है।
अतिक्रमण का हिस्सा ई-रिक्शा:-
शहर में केवल दुकानदारों की वजह से ही सड़कें संकिर्ण नहीं हो रही बल्कि यहां की सड़कों पर चलने वाली ई-रिक्शा भी अतिक्रमण का एक बहुत बड़ा कारण माना जा रहा है। इन रिक्शा चालकों को नियम कानून से कोई वास्ता नहीं है। कब कहां रिक्शा लगाकर पैसेंजर चढ़ाने व उतारने लगेंगे, कहना मुश्किल है। फलतः कई बार ई-रिक्शा चालकों से कई बार दुर्घटनाएं भी हो रही है। ऐसे लोगों को परिवहन नियमों के लिए जागरूक करने व नियमों की जानकारी परिवहन विभाग द्वारा दिये जाने की आवश्यकता है।

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