कैमरामैन माधब कृष्ण दास की प्रेरक यात्रा , विश्व फोटोग्राफी दिवस विशेष फीचर – 19 अगस्त 2025 – पटना, ।

रवि रंजन ।
हर तस्वीर एक कहानी कहती है, लेकिन हर फ्रेम के पीछे एक अनदेखा कथाकार खड़ा होता है—कैमरामैन। विश्व फोटोग्राफी दिवस 2025 पर हम पेश कर रहे हैं दूरदर्शन केंद्र, पटना के वरिष्ठतम कैमरामैन ग्रेड–I और राजपत्रित अधिकारी मधब कृष्ण दास की प्रेरक यात्रा, जिन्होंने तीन दशक से अधिक समय देश के महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे की नज़र से इतिहास बना दिया।
शुरुआती कदम
1969 में असम के डिब्रूगढ़ में जन्मे दास को बचपन से ही दृश्यों और कहानी कहने का शौक था। 1993 में उन्होंने बेंगलुरु से सिनेमैटोग्राफी में डिप्लोमा किया और फिल्म संस्थानों में अध्यापन के साथ कई टीवी चैनलों में काम किया। 1992 में उनका पहला फोटो–फीचर मैगज़ीन “TORA” युवाओं के बीच चर्चा में रहा।
दूरदर्शन से जुड़ाव
1999 में दास ने दूरदर्शन केंद्र, मुजफ्फरपुर से बतौर कैमरामैन ग्रेड–II अपनी यात्रा शुरू की। आज वे पटना केंद्र में वरिष्ठतम कैमरामैन ग्रेड–I के पद पर कार्यरत हैं। श्वेत–श्याम कैमरे से लेकर डिजिटल युग तक उनकी आंखों ने मीडिया की तकनीकी क्रांति को देखा और कैद किया।
“कैमरे बदल गए हैं, लेकिन जिम्मेदारी वही है—सच्चाई को ईमानदारी और संवेदनशीलता से पेश करना,” वे कहते हैं।
यादगार कवरेज
उनकी लेंस ने कई ऐतिहासिक पलों को अमर किया—
अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का विशेष लाइव कवरेज
लगातार चार वर्षों तक गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस परेड
जी–20 शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली
पुरी जगन्नाथ रथयात्रा
प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन
साथ ही कई सांस्कृतिक, ग्रामीण और आपदा कवरेज में उन्होंने बिहार व भारत की अनकही कहानियाँ सामने रखीं।
चुनौतियाँ और संघर्ष
“लोग प्रसारण देखते हैं, पर पीछे की मेहनत नहीं—तेज़ धूप, बाढ़ का पानी, घंटों इंतज़ार। यही असली संघर्ष है,” वे मुस्कुराते हुए कहते हैं।
छठ की छवि
दास के दिल के सबसे करीब छठ पूजा की कवरेज है—
“गंगा किनारे डूबते सूरज की सुनहरी आभा को कैमरे में कैद करना अविस्मरणीय होता है।”
युवाओं के लिए संदेश
विश्व फोटोग्राफी दिवस की थीम “मेरा पसंदीदा फोटो” पर दास कहते हैं—
“सिर्फ़ गैजेट्स नहीं, नज़रिया अहम है। आपकी पसंदीदा तस्वीर वही होगी, जो दर्शकों के दिल को छू ले।”
कैमरे की मौन गरिमा
“हम स्क्रीन पर नहीं दिखते, लेकिन हमारे फ्रेम ही कहानी गढ़ते हैं। यही कैमरामैन की मौन गरिमा है।”
शौक और रचनात्मकता
पेशेवर काम से इतर दास संगीत और पेंटिंग में गहरी रुचि रखते हैं। उनके लिए कला केवल पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।
माधव कृष्ण दास की यात्रा हमें याद दिलाती है कि हर ऐतिहासिक तस्वीर के पीछे एक समर्पित कथाकार खड़ा होता है—जो पलों को इतिहास में बदल देता है।