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दर्द, धोखा और दहेज की कीमत पर टूटा प्रेम -स्वजातीय विवाह की अनसुनी दास्तान – नवादा ।

रवीन्द्र नाथ भैया ।

दो साल का प्रेम, स्वजातीय विवाह, और एक नई ज़िंदगी की उम्मीद… लेकिन इस प्यार की कहानी दहेज की 10 लाख की मांग के सामने टूट गई। यह हृदय विदारक घटना जिले के उग्रवाद प्रभावित सिरदला थाना क्षेत्र की है, जहां एक युवती अपने सपनों को टूटते देख रही है और इंसाफ की गुहार लगा रही है।
कुशाहन गांव की युवती और गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के फरका गांव के युवक के बीच दो साल से मोबाइल पर बातचीत हो रही थी। दोनों स्वजातीय हैं। समाज की एक जैसी पृष्ठभूमि होने के बावजूद परिवारों की सोच और लालच ने उनके प्रेम को कुचल दिया।
करीब दो माह पहले दोनों ने मेसकौर प्रखंड के सीतामढ़ी मंदिर में विवाह रचाया। विवाह के बाद दोनों गुजरात चले गए, जहां काम करते हुए नए जीवन की शुरुआत की। दोनों खुश थे, लेकिन शायद किस्मत को यह मंजूर नहीं था।
दोनों अपने-अपने गांव लौटे। युवती जब ससुराल पहुंची तो लड़के के परिजनों ने शादी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। आरोप है कि उन्होंने साफ कहा कि बिना दहेज के यह रिश्ता मंजूर नहीं है। उन्हें घर से निकाल दिया गया। यह सुनकर युवती के सपने चकनाचूर हो गए।
मायूस होकर युवती ने अपने परिजनों को बुलाया। परिजन जब फरका गांव पहुंचे तो बात बिगड़ गई। वे मदद के लिए परनाडाबर थाना गए, लेकिन मामला सिरदला थाना क्षेत्र का होने के कारण वहां से सिरदला थाना भेजा गया। सिरदला थाना पहुंचकर युवती ने थानाध्यक्ष मोहन कुमार से आपबीती सुनाई।
थाने में दोनों ने बताया कि वे बालिग हैं और कोर्ट मैरेज करेंगे ताकि कोई कानूनी अड़चन न रहे। रात को लड़की अपने रिश्तेदार के घर सिरदला बाजार में रुकी और लड़का भी वहीं रुका।
लेकिन रात को कहानी में बड़ा मोड़ आया। करीब दो बजे लड़का बाथरूम जाने का बहाना बना और चुपचाप फरार हो गया। जब काफी देर बाद भी वह नहीं लौटा, तो युवती को अनहोनी का अहसास हुआ। सुबह होते-होते उसने समझ लिया कि वह फिर से धोखा खा चुकी है।
लड़की का कहना है कि अब लड़का भी वही बात दोहरा रहा है जो उसके घरवाले कह रहे थे—”हमसे 10 लाख ले लो और किसी और से शादी कर लो।” यह सुनकर युवती पूरी तरह टूट गई। उसने फिर से सिरदला थाना में शिकायत दी और इंसाफ की मांग की।
युवती का कहना है, “हम दोनों एक ही जाति के हैं, फिर भी उनके घरवालों को शादी पसंद नहीं आई। अब पैसे की मांग कर रहे हैं। क्या प्यार की भी अब बोली लगती है?”
इस घटना ने समाज को झकझोर दिया है। गांव के लोग कह रहे हैं कि अगर स्वजातीय विवाह में भी लड़कियों को दहेज के लिए ठुकराया जा रहा है, तो फिर अंतरजातीय विवाह की स्थिति कितनी भयावह होगी?
मामला समाज के उन दो चेहरों को सामने लाता है, जहां एक ओर युवा पीढ़ी प्रेम और आत्मनिर्भरता की राह पर है, वहीं दूसरी ओर दहेज की पुरानी सोच अब भी उसे कुचल रही है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है। युवती ने अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ाई लड़ने की ठानी है। उसने कहा, “मैं किसी का बोझ नहीं हूं। अगर साथ नहीं निभा सकते थे, तो साथ क्यों मांगा?”
इस दर्दभरी कहानी ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक बेटियों को दहेज की आग में जलाया जाएगा? कब समाज समझेगा कि प्यार कोई सौदा नहीं होता?

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