पत्रकार पेंशन योजना मात्र छलावा – नवादा ।
आंचलिक पत्रकारों के साथ भेदभाव

रवि रंजन ।
पत्रकार पेंशन योजना सही मायने में पत्रकारों के हिट में है या लॉलीपाप ..
जी हाँ पत्रकार पेंशन योजना तो पत्रकारों के लिये लागू कर दी गई है पर इसकी समीक्षा कर यह मूल्यांकन नही किया गया कि ज़िले और अंचल में कितने पत्रकारों को अपॉइंटमेंट लेटर और पेय स्लिप मिलता है शायद किसी को नही , बैसे में उन पत्रकारों के लिये यह योजना सिर्फ लॉलीपॉप है ।
सरकार को ज़िले और प्रखंड स्तर के पत्रकारों की समीक्षा कर उसको ध्यान में रखते हुए पत्रकार पेंशन योजना के गाइड लाइन में सुधार की आवश्यकता है ।
सरकार कहती है कि हर उस व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचाने के लिये कृतसंकल्प है तो फिर ये भी सवाल उठता है कि सरकार द्वारा यह योजना से अब तक बिहार के कितने पत्रकार लाभान्वित हुए और कितने बंचित है …
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पत्रकारों के लिए लागू पेंशन योजना की राशि में भारी वृद्धि कर दी है। बावजूद इसका स्वागत करने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसा इसलिए कि पत्रकार पेंशन योजना मात्र छलावा है। योजना का लाभ पटना कार्यालय में बैठे पत्रकारों के लिए है न कि आंचलिक पत्रकारों के लिए।
राज्य में एक भी ऐसा जिला नहीं जहां आंचलिक पत्रकारों को पेंशन का लाभ मिल रहा हो। फिर सबसे बड़ा सवाल स्वागत करे तो कौन?
जिले के पत्रकार राम जी ने योजना आरंभ होने के बाद पेंशन के लिए एक नहीं कई बार आवेदन दिया लेकिन अबतक योजना का लाभ नहीं मिला।
आश्चर्य तो यह कि आजतक योजना की न तो समीक्षा हुई न ही आंचलिक पत्रकारों को योजना में शामिल किया गया। जबकि अखबार का रीढ़ ही आंचलिक पत्रकारों को माना गया है। आंचलिक पत्रकार नहीं रहे तो अखबार की कल्पना नहीं की जा सकती। फिर कारपोरेट मीडिया से लेकर सरकार तक आंचलिक पत्रकारों का शोषण करने में लगा है।
दूसरे को बंधुआ मजदूर से मुक्त कराने वाले आंचलिक पत्रकार को बंधुआ मजदूर वाली मजदूरी तक नहीं मिलती। ऐसे में राज्य सरकार को इसकी समीक्षा कर आंचलिक पत्रकारों को पेंशन योजना का लाभ देने की आवश्यकता है। जिले में कई ऐसे पत्रकार हैं जो बगैर किसी शुभ लाभ के मात्र आज भी पत्रकारिता कर रहे हैं जिन्हें मदद की आवश्यकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल! मदद करेगा कौन?